Tuesday, 7 November 2017

panchayati Raj And Gramin vyavtha MP Patwari 2017 Vacancy, Syllabus and Study Material

MP PATWARI EXAM MATERIAL



  • भारत गांवों का देश है। गांवों की उन्नति और प्रगति पर ही भारत की उन्नति एवं प्रगति निर्भर करती है। महात्मा गांधी के अनुसार, यदि गांव नष्ट होते हैं तो भारत नष्ट हो जाएगा। भारत के संविधान निर्माता भी इस तथ्य से भली-भांति परिचित थे, अतः देश के विकास एवं उन्नति को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण शासन व्यवस्था की ओर पर्याप्त ध्यान दिया गया। संविधान के अनुच्छेद-40 के अंतर्गत पंचायती राज व्यवस्था को राज्य के नीति-निदेशक तत्वों के अंतर्गत रखा गया है। वस्तुतः भारतीय लोकतंत्र इस आधारभूत अवधारणा पर आधारित है कि शासन के प्रत्येक स्तर पर जनता अधिक-से-अधिक शासन सम्बन्धी कार्यों में हाथ बंटाए तथा स्वयं पर राज्य करने का उत्तरदायित्व स्वयं वहन करे। पंचायतें भारत के राष्ट्रीय जीवन की रीढ़ हैं। देश के राजनीतिक भविष्य एवं भावी राजनीतिक चाल का निर्धारण संघीय व्यवस्था में बैठे बड़े-बड़े राजनीतिज्ञ की अपेक्षा, विभिन्न राज्यों के ग्रामीण अंचलों में विद्यमान पंचायती राज संस्थाएं ही करती हैं।


भारतीय संविधान के अनुच्छेद ४० में राज्यों को पंचायतों के गठन का निर्देश दिया गया हैं। 1991मैं संविधान में ७३वां संविधान संशोधन अधिनियम, १९९२ करके पंचायत राज संस्था को संवैधानिक मान्यता दे दी गयी हैं।
  • बलवंत राय मेहता समिति की सिफारिशें (1957) –
  • अशोक मेहता समिति की सिफारिशें (1977) –
  • डॉ एल ऍम सिन्घवी समिति (१९८६) –
  • ग्राम सभा को ग्राम पंचायत के अधीन किसी भी समिति की जाँच करने का अधिकार 
73वें संशोधन अधिनियम, 1993 में निम्नलिखित प्रावधान किये गये हैं:
  • एक त्रि-स्तरीय ढांचे की स्थापना (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति या मध्यवर्ती पंचायत तथा जिला पंचायत)
  • ग्राम स्तर पर ग्राम सभा की स्थापना
  • हर पांच साल में पंचायतों के नियमित चुनाव
  • अनुसूचित जातियों/जनजातियों के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटों का आरक्षण
  • महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटों का आरक्षण
  • पंचायतों की निधियों में सुधार के लिए उपाय सुझाने हेतु राज्य वित्ता आयोगों का गठन
  • राज्य चुनाव आयोग का गठन
73वां संशोधन अधिनियम पंचायतों को स्वशासन की संस्थाओं के रूप में काम करने हेतु आवश्यक शक्तियां और अधिकार प्रदान करने के लिए राज्य सरकार को अधिकार प्रदान करता है। ये शक्तियां और अधिकार इस प्रकार हो सकते हैं:
संविधान की गयारहवीं अनुसूची में सूचीबध्द 29 विषयों के संबंध में आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करना और उनका निष्पादन करना कर, डयूटीज, टॉल, शुल्क आदि लगाने और उसे वसूल करने का पंचायतों को अधिकार राज्यों द्वारा एकत्र करों, डयूटियों, टॉल।

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